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ज़िंदगी का साज़

ज़िंदगी ने गीत गाया, हमने सुना नहीं। 

हमने साज़ बजाया, जिंदगी बेताला हंसी।


दूर कहीं पर, एक फूल खिला।

उसने खुशबू बिखेरी, हमने अनदेखा किया।


हम हमेशा भटकते रहे, थकने से इंकार किया।

आसमां तकते रहे, और चमत्कार हमारे पीछे होते रहे।

 

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