Vikas' Book Journal: जे - लोकेश गुलयानी: किताब 8 फ़रवरी 2019 से 9 फरवरी 2019 के बीच पढ़ी गई संस्करण विवरण: फॉर्मेट: पेपरबैक पृष्ठ संख्या : 144 प्रकाशन: कश्यप पब्लिकेशन आईएसबीएन...
क्या खोज रहा हूं, किसकी प्यास है पता नहीं दरिया, समंदर, किश्ती, किनारा, इनकी मुझे तलाश नहीं। रो दूं, तो आंसू भी ज़मी पी जाए जो न रोऊं, तो ख़ून में आंच नहीं। पत्थर के घर में रहता हूं, शीशा बनकर टूट जाऊं तो किसी का मोहताज नहीं। रात है, बात है, रात की ही बात है सुबह बोल जाऊं तो मुझसा बदज़ात नहीं। क्या देखते हो, क्या देखने आए हो तुम्हें पसंद आए, ऐसे तो हालात नहीं। रात को इंसा भौंकते हैं, और कुत्ते सोते हैं किसकी सरकार है, के आदमी की कोई औकात नहीं।
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